Shiv Tandav Stotram PDF Download : नमस्कार दोस्तों ! हम अपनी आज की इस पोस्ट में आपके लिए शिव तांडव स्तोत्र की पीडीएफ (Shiv Tandav Stotram PDF Download) लेकर आएं हैं। शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) की रचना रावण ने की थी। इस शिव तांडव स्तोत्र में रावण ने 17 श्लोकों के माध्यम से भगवान शिव जी की स्तुति की है। रावण द्वारा रचित यह शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) बहुत ही चमत्कार करने वाला है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भगवान शिव जी बहुत जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं और मनचाहा आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
यदि आप भगवान शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो आपको भी शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ अवश्य ही करना चाहिए। रावण द्वारा लिखित शिव तांडव स्तोत्र पीडीएफ (Shiv Tandav Stotram PDF Download) का लिंक आपको पोस्ट में नीचे दिया गया है, जहां से आप शिव तांडव स्तोत्र पीडीएफ डाउनलोड (Shiv Tandav Stotram PDF Download) बहुत ही आसानी से केवल एक क्लिक में फ्री में कर सकते हैं।
शिव तांडव स्तोत्र क्या है (Shiv Tandav Stotram Kya Hai)
शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) हिंदू धर्म का एक प्रमुख स्तोत्र है। इसकी रचना रावण ने की थी। शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) में कुल 17 श्लोक हैं जिनके माध्यम से रावण ने भगवान शिव जी की स्तुति की है। इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से भगवान शिव जी शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं और मनचाहा आशीर्वाद प्रदान करते हैं। शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) के मात्र सुनने से ही मनुष्य को सम्पत्ति, समृद्धि तथा सन्तान आदि की प्राप्ति हो जाती है।
शिव तांडव स्तोत्र की रचना कैसे हुई (Shiv Tandav Stotram Ki Rachna Kaise Hui)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण भगवान शिव जी का परम भक्त था। एक बार रावण ने अहंकार में आकर पूरे कैलाश पर्वत की ही उठा लिया था और पूरे कैलाश पर्वत को ही लंका ले जाने लगा था। भगवान शिव जी को रावण का यह अहंकार बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। जब भगवान शिव जी ने मात्र अपने पैर के अंगूठे से थोड़ा-सा दाब लगाया तो कैलाश पर्वत जहां था वहीं स्थिर हो गया और शिवभक्त रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया। तब परम शिवभक्त रावण ने भगवान शिव जी की स्तुति की, जो कालांतर में शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) के नाम से प्रसिद्ध हुई।
इस स्तोत्र से भगवान शिव जी इतना प्रसन्न हुए की उन्होंने रावण को सकल समृद्धि और सिद्धि से परिपूर्ण सोने की लंका ही वरदान के रूप में दे दी और साथ ही सम्पूर्ण ज्ञान तथा अमरता का वरदान भी दे दिया।
शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने की विधि (Shiv Tandav Stotram Ka Path Karne Ki Vidhi)
शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ करने की विधि निम्नलिखित है :-
- मान्यताओं के अनुसार, शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ प्रातः काल या प्रदोष काल में ही करना उत्तम होता है।
- शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने के लिए सबसे पहले स्नान आदि कार्यों को कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
- इसके बाद भगवान शिव जी को प्रणाम कर उनकी धूप, दीप और नैवेद्य आदि से पूजा करें।
- इसके बाद शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ गाते हुए करें, क्योंकि शिवभक्त रावण ने बहुत तेज स्वर में इस स्तोत्र का पाठ किया था। इस स्तोत्र का पाठ नृत्य करते हुए करना और अधिक लाभदायक और फलकारी होता है, किंतु तांडव नृत्य मात्र पुरुष ही कर सकते हैं।
- अब शिव तांडव स्तोत्र का पाठ के पूर्ण हो जाने के बाद भगवान शिव जी का ध्यान लगाएं।
- शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपके मन में किसी भी व्यक्ति के प्रति द्वेष आदि जैसे भाव उत्पन्न नहीं होने चाहिए।
शिव तांडव स्तोत्र के फायदे (Shiv Tandav Stotram Ke Fayde)
शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) के फायदे निम्नलिखित हैं :-
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ नियमित रूप से करने पर मनुष्य की प्रत्येक मनोकामना पूर्ण होती है।
- माना जाता है कि शिव तांडव स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से धन-सम्पति में वृद्धि होती है।
- इसका पाठ करने से मनुष्य का चेहरा तेजमय होता है और उसका आत्मबल भी मजबूत बनता है।
- इसका पाठ करने पर भगवान शिव जी की कृपा से लेखन, नृत्य, योग, चित्रकला आदि सभी विषयों में सफलता प्राप्त होती है।
- जिन लोगों की कुण्डली में सर्प योग, कालसर्प योग और पितृ दोष लगे होते हैं, उन्हें शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ अवश्य ही करना चाहिए। इसके पाठ से इन दोषों के कुप्रभावों से छुटकारा मिलता है।
- शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ करने से शनि दोष के दुष्प्रभावों से संरक्षण प्राप्त होता है।
शिव तांडव स्तोत्र पीडीएफ डाउनलोड फ्री (Shiv Tandav Stotram PDF Download Free)
शिव तांडव स्तोत्र पीडीएफ डाउनलोड (Shiv Tandav Stotram PDF Download) करने के लिए नीचे दिए गए डाउनलोड बटन पर क्लिक करें :-
पुस्तक का नाम / Name of Book |
शिव तांडव स्तोत्र / Shiv Tandav Stotram |
लेखक / Author |
रावण / Ravana |
पुस्तक की भाषा / Language of Book |
संस्कृत / Sanskrit |
फाइल प्रारूप / File Format |
पीडीएफ / PDF |
पुस्तक का आकार / Size of E-book |
1 MB |
पुस्तक में कुल पृष्ठ / Total pages in E-book |
20 पृष्ठ |
You have to wait 45 seconds.
निष्कर्ष : शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) रावण द्वारा लिखित एक स्तोत्र है, जिसमें कुल 17 श्लोक हैं जिनके द्वारा भगवान शिव जी की स्तुति की गई है। शिव तांडव स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से मनुष्य को अनेक लाभ मिलते हैं।
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FAQs : Frequently Asked Questions
Q : शिव तांडव स्तोत्र के लेखक कौन है?
Ans : शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) की रचना भगवान शिव जी के परम भक्त रावण ने की थी।
Q : शिव तांडव स्तोत्रम में कितने श्लोक हैं?
Ans : शिवभक्त रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) में कुल 17 श्लोक हैं जिनके द्वारा रावण ने भगवान शिव जी की स्तुति की है।
Q : शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कैसे करना चाहिए?
Ans : शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ करने की विधि निम्नलिखित है :-
- मान्यताओं के अनुसार, शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ प्रातः काल या प्रदोष काल में ही करना उत्तम होता है।
- इसका पाठ करने के लिए सबसे पहले स्नान आदि कार्यों को कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
- इसके बाद भगवान शिव जी को प्रणाम कर उनकी धूप, दीप और नैवेद्य आदि से पूजा करें।
- इसके बाद शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ गाते हुए करें, क्योंकि शिवभक्त रावण ने बहुत तेज स्वर में इस स्तोत्र का पाठ किया था। इस स्तोत्र का पाठ नृत्य करते हुए करना और अधिक लाभदायक और फलकारी होता है, किंतु तांडव नृत्य मात्र पुरुष ही कर सकते हैं।
- अब शिव तांडव स्तोत्र का पाठ के पूर्ण हो जाने के बाद भगवान शिव जी का ध्यान लगाएं।
- शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) का पाठ करते समय अपने मन में किसी भी व्यक्ति के प्रति द्वेष आदि जैसे भाव उत्पन्न न करें।
Q : क्या शिव तांडव स्तोत्रम का जप करना अच्छा है?
Ans : हां, शिव तांडव स्तोत्रम का जप करना अच्छा है। इसका पाठ करने से मनुष्य की प्रत्येक मनोकामना पूर्ण होती है, धन-सम्पति में वृद्धि होती है, चेहरा तेजमय होता है, आत्मबल मजबूत बनता है तथा लेखन, नृत्य, योग, चित्रकला आदि सभी विषयों में सफलता प्राप्त होती है। इसके पाठ से सर्प योग, कालसर्प योग, पितृ दोष और शनि दोष आदि के दुष्प्रभावों से छुटकारा मिलता है।
Q : रावण ने शिव तांडव क्यों गाया था?
Ans : पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार जब रावण अहंकार में आकर कैलाश को लेकर लंका की ओर चलने लगा तो भगवान शिव जी ने मात्र अपने अंगूठे के थोड़े-से दाब से ही कैलाश को वहीं स्थिर कर दिया और रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया। तब शिवभक्त रावण ने पीड़ा के कारण भगवान शिव जी की गाते हुए स्तुति की। जिस स्तुति को शिव तांडव स्तोत्र (Shiv Tandav Stotram) के नाम से जाना गया।