भक्तामर स्तोत्र क्या है, उत्पत्ति, महत्त्व और पीडीएफ फ्री डाउनलोड
नमस्कार दोस्तों ! आज की इस पोस्ट में हम आपके लिए भक्तामर स्तोत्र पीडीएफ (Bhaktamar Stotra In Hindi PDF) लेकर आए हैं। भक्तामर स्तोत्र जैन धर्म का एक प्रमुख स्त्रोत है। यह आचार्य मानतुंग जी द्वारा रचित जैन परंपराओं में सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध प्रार्थना है। इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से व्यक्ति को अपने मन में शांति का अहसास होता है तथा उस व्यक्ति को सुख, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है। यह मान्यता है कि भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का पाठ सच्चे मन के साथ करने से व्यक्ति को अवश्य ही साक्षात ईश्वर की अनुभति होती है।
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भक्तामर स्तोत्र क्या है (What Is Bhaktamar Stotra)
भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) मंत्र शक्ति में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए एक दिव्य और चमत्कारिक स्तोत्र है। भक्तामर स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंगा जी ने लगभग 7वीं शताब्दी में की थी। भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) में प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जी की स्तुति की गई है। यह आचार्य मानतुंग द्वारा रचित सभी जैन परंपराओं में सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध संस्कृत प्रार्थना है। यह स्तोत्र चमत्कारिक और अत्यंत शक्तिशाली है।
भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का दूसरा नाम आदिनाथ स्रोत्र भी है। इस स्तोत्र का पहला शब्द भक्तामर होने के कारण ही इस स्तोत्र को भक्तामर स्तोत्र के नाम से जाना गया। भक्तामर स्तोत्र में कुल 48 छंद हैं। यह सभी छंद बंसततिलका छंद में संस्कृत भाषा में लिखित हैं। एक बंसततिलका छंद में कुल 56 अक्षर और 84 मात्राएं होती हैं। इस प्रकार भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) में कुल 2688 अक्षर व 4032 मात्राएं हैं।
भक्तामर स्तोत्र की उत्पत्ति कैसे हुई (How Did Bhaktamar Stotra Originate)
भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) की उत्पत्ति के बारे में कई किंवदंतियाँ हैं। जिनमें सबसे प्रसिद्ध किदवंती यह है कि एक बार आचार्य मानतुंग जी को राजा भोज ने कड़े पहरे के साथ एक अंधेरी जेल में बंद करवा दिया। उस जेल के 48 दरवाजे थे और प्रत्येक दरवाजे पर 48 भारी और मजबूत ताले लगे हुए थे।
तब उस समय आचार्य मानतुंग जी ने भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) की रचना करना प्रारम्भ किया। जैसे ही उन्होंने इसकी रचना करना प्रारंभ किया, आचार्य मानतुंग जी के चारों ओर की जंजीरें स्वतः ही खुल गईं और सभी 48 ताले उनके प्रत्येक श्लोक के साथ अपने आप ही टूट गए। राजा भोज को इस घटना ने बहुत आश्चर्यचकित कर दिया और उन्हें इस घटना से धर्म के वास्तविक अर्थ का अनुभव हुआ।
भक्तामर स्तोत्र का महत्त्व (Importance Of Bhaktamar Stotra)
भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का जैन धर्म में बहुत ही महत्त्व है। भक्तामर स्तोत्र का प्रत्येक शब्द ईश्वर के प्रति असीम भक्ति और आस्था को प्रकट करता है। भक्तामर स्तोत्र का नियमित रूप से जप करने से जीवन की सभी बाधाएं और समस्याएं दूर हो जाती हैं और जीवन भी सुचारू रूप से चलने लगता है। इसका पाठ करने से जीवन के सभी प्रयासों और नई शुरुआतों में सफलता मिलती है और जीवन में सौभाग्य की भी प्राप्ति होती है। भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का तीसरा काव्य सर्व कार्य सिद्धि दायक है। जो निम्नलिखित है :-
बुद्ध्या विनापि विबुधार्चित – पाद – पीठ!
स्तोतुं समुद्यत – मतिर्विगत – त्रपोऽहम्।
बालं विहाय जल-संस्थित-मिन्दु-बिम्ब-
मन्य: क इच्छति जन: सहसा ग्रहीतुम्
इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से व्यक्ति को अपने मन में शांति का अहसास होता है तथा उस व्यक्ति को सुख, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है। यह मान्यता है कि भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का पाठ सच्चे मन के साथ करने से व्यक्ति को अवश्य ही साक्षात ईश्वर की अनुभति होती है। इस स्तोत्र में परमात्मा के अनुपम गुणों का और असीम महत्ता का बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है।
इसका प्रत्येक श्लोक अतुल्य, अद्भुत और दिव्य है। यह स्तोत्र विनय, समर्पण और भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण है। इस स्तोत्र का पाठ विनय और पूर्ण समर्पण भाव से करने से शरीर में दिव्य ऊर्जा का प्रवाह होता है जो हमारे आत्मिक उत्थान का कारक बनती है।
भक्तामर स्तोत्र पीडीएफ डाउनलोड फ्री (Bhaktamar Stotra In Hindi PDF Download Free)
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पीडीएफ का नाम / Name of PDF |
भक्तामर स्तोत्र पीडीएफ / Bhaktamar Stotra In Hindi PDF |
पीडीएफ की भाषा / Language of PDF |
हिंदी / Hindi |
फाइल प्रारूप / File Format |
पीडीएफ / PDF |
पीडीएफ का आकार / Size of PDF |
891 KB |
पीडीएफ में कुल पृष्ठ / Total Pages in PDF |
8 पृष्ठ |
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निष्कर्ष :- हम उम्मीद करते हैं कि आपको भक्तामर स्तोत्र पीडीएफ (Bhaktamar Stotra In Hindi PDF) के बारे में यह पोस्ट पसंद आई होगी और आपको काफी मदद भी मिली होगी। आज की इस पोस्ट में आपने जाना कि भक्तामर स्तोत्र क्या है, इसकी उत्पत्ति कैसे हुई और इसका महत्त्व क्या है ? अंत में भक्तामर स्तोत्र पीडीएफ (Bhaktamar Stotra In Hindi PDF) डाउनलोड करने का लिक दिया गया है। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो इस पोस्ट को आप अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें।
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FAQs : Frequently Asked Questions
Q : भक्तामर स्तोत्र का क्या महत्व है?
Ans : भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का जैन धर्म में बहुत ही महत्त्व है। यह आचार्य मानतुंग जी द्वारा रचित जैन परंपराओं में सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध प्रार्थना है। इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करने से व्यक्ति को अपने मन में शांति का अहसास होता है तथा उस व्यक्ति को सुख, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है। यह मान्यता है कि भक्तामर स्तोत्र का पाठ सच्चे मन के साथ करने से व्यक्ति को अवश्य ही साक्षात ईश्वर की अनुभति होती है।
Q : भक्तामर पाठ का वह कौन सा काव्य है जो सर्व कार्य सिद्धि दायक है?
Ans : भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का तीसरा काव्य सर्व कार्य सिद्धि दायक है। जो निम्नलिखित है :-
बुद्ध्या विनापि विबुधार्चित – पाद – पीठ!
स्तोतुं समुद्यत – मतिर्विगत – त्रपोऽहम्।
बालं विहाय जल-संस्थित-मिन्दु-बिम्ब-
मन्य: क इच्छति जन: सहसा ग्रहीतुम्
Q : भक्तामर स्तोत्र का दूसरा नाम क्या है?
Ans : भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का दूसरा नाम आदिनाथ स्रोत्र है। इस स्तोत्र का पहला शब्द भक्तामर होने के कारण ही इस स्तोत्र को भक्तामर स्तोत्र के नाम से जाना गया।
Q : भक्तामर स्तोत्र कितना शक्तिशाली है?
Ans : भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) जैन धर्म का एक चमत्कारिक और अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है। जब हम भक्तामर स्तोत्र का जाप करते हैं, तो यह शरीर, मन और आत्मा को एक विलक्षणता या एकता में संरेखित करता है और इसके परिणामस्वरूप चेतना में एक बड़ा बदलाव होता है। जब इसका पाठ नियमित रूप से 21 दिनों तक और अधिमानतः एक ही स्थान और समय पर किया जाए तो इसका व्यक्ति पर जबरदस्त प्रभाव पड़ता है।
Q : भक्तामर स्त्रोत में कौन से तीर्थंकर की स्तुति की गई है?
Ans : भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) में प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जी की स्तुति की गई है। यह आचार्य मानतुंग द्वारा रचित सभी जैन परंपराओं में सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध संस्कृत प्रार्थना है। यह स्तोत्र चमत्कारिक और अत्यंत शक्तिशाली है।
Q : भक्तामर स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?
Ans : भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) जैन धर्म का एक चमत्कारिक और अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसका पाठ बहुत ही श्रद्धापूर्वक किया जाता है। सूर्योदय का समय भक्तामर स्तोत्र का पाठ करने के लिए अत्यंत उत्तम होता है। अगर आप सालभर निरंतर पढ़ना शुरू करना चाहते हो तो आप श्रावण, भाद्रपद, कार्तिक, पौष, अगहन या माघ में कर सकते हैं।
Q : भक्तामर स्तोत्र का जप करने से क्या लाभ होते हैं?
Ans : भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का नियमित रूप से जप करने से जीवन की सभी बाधाएं और समस्याएं दूर हो जाती हैं और जीवन भी सुचारू रूप से चलने लगता है। इसका पाठ करने से जीवन के सभी प्रयासों और नई शुरुआतों में सफलता मिलती है और जीवन में सौभाग्य की भी प्राप्ति होती है।
Q : भक्तामर स्तोत्र की रचना किसने की?
Ans : भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का जैन धर्म में बहुत ही महत्त्व है। भक्तामर स्तोत्र की रचना आचार्य मानतुंगा जी ने लगभग 7वीं शताब्दी में की थी। यह आचार्य मानतुंग द्वारा रचित सभी जैन परंपराओं में सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध संस्कृत प्रार्थना है।
Q : भक्तामर स्तोत्र का अब तक कितनी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है?
Ans : अब तक भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) का अनुवाद लगभग 130 बार में किया जा चुका है। यह स्तोत्र अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, उर्दू, पंजाबी, और अन्य कई भाषाओं में उपलब्ध है।
Q : भक्तामर स्तोत्र में कुल कितने अक्षर है?
Ans : भक्तामर स्तोत्र (Bhaktamar Stotra) में कुल 48 छंद हैं। यह सभी छंद बंसततिलका छंद में संस्कृत भाषा में लिखित हैं। एक छंद में कुल 56 अक्षर और 84 मात्राएं होती हैं। इस प्रकार भक्तामर स्तोत्र में कुल 2688 अक्षर व मात्राएं 4032 हैं।